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◄══════════════════════════◄ मंजिल मिल ही जायेगी एक दिन, भटकते-भटकते ही सही । गुमराह तो वो है, जो घर से निकले ही नहीं ॥ ◄══════════════════════════◄ Via- Shivam Shukla Kheda Muhal Lakhna (Etawah)